भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेश भर में धान खरीदी की अव्यवस्था के खिलाफ 16 जनवरी को जिला मुख्यालयों में करेंगे आंदोलन

सक्ती/ छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा की जा रही धान खरीदी इस वर्ष शुरुआत से ही भारी अव्यवस्था का शिकार हो रहे हैँ, किसान लगातार अपनी उपज बेचने के लिए परेशान है, लेकिन शासन-प्रशासन की ओर से समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं किया गया।
कभी टोकन जारी नहीं होना, कभी खरीदी सीमा (लिमिट) कम करना, तो कभी खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था—इन सभी कारणों से किसान महीनों से भटकने को मजबूर है।यह भी चिंतनीय है कि धान खरीदी की प्रक्रिया को सुगम करने का प्रयास करने की बजाय, शासन के दिशा निर्देश किसानों की सत्यनिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए प्रतीत होते हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि धान खरीदी सत्र समाप्त होने में अब केवल 15 दिन शेष हैं, जबकि अब तक मात्र लगभग 65 प्रतिशत धान की ही खरीदी हो पाई है।
यह सीधे-सीधे किसानों के साथ अन्याय है। खेतों में मेहनत कर धान पैदा करने वाला किसान आज अपने ही धान को बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है।
इस गंभीर स्थिति को लेकर भारतीय किसान संघ ने 16 जनवरी को छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
इस दौरान किसान प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे और सरकार से तत्काल सभी किसानों को टोकन उपलब्ध कराने, खरीदी लिमिट बढ़ाने, धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने, कैरी फारवर्ड की समस्या सुधारने तथा खरीदी व्यवस्था को सुचारु करने
की मांग करेंगे।
भारतीय किसान संघ कहना है कि सरकार किसानों के मध्य अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है क्योकि भ्रष्ट और किसानों की पेट मे लात मारने, किसानो का निवाल छिनने वाले धान खरीदी केंद्र प्रभारियों के ऊपर मेहरबान हो चुकी है जैसे की पोरथा धान खरीदी प्रभारी लकेश्वर राठौर के खिलाफ पूरे सबूत होने के बावजूद,सरकार कुछ भी कार्यवाही नही कर रही है, जिनका पुर्व मे वर्ष 2008, मे सकर्रा धान खरीदी केंद्र सकर्रा मे इसी प्रकार का घोटाला किया गया था 42,किलो 43किलो 44किलो तौल मे ले रहा था और बेवजह 36 किसान भाई लोग नौ वर्ष तक परेशान हुए थे। अब यह बात सभी को समझ आ चुकी है की सरकार कम से कम धान खरीदी करना चाहती है। किसान संघ का किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।

भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ जिला सक्ती अध्यक्ष रमाकांत चंद्रा ने की अपील-

सक्ति  जिला के सभी किसान भाइयों से विशेष निवेदन/अपील है की आपकी किसी भी प्रकार की समस्या है किसानों का टोकन नही कटने, खरीदी लिमिट बढ़ाने, धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने, कैरी फारवर्ड की समस्या सुधारने तथा खरीदी व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने की बात हो, किसान भाइयो इतिहास मे पहली बार ऐसा हो रहा है जब किसान अपना खुन पसीने की कमाई धान बेचने के लिए आत्महत्या कर रहा है, 6,7, करोड़ का धान चूहें खा जा रहे हैं, और किसान बिना के सी सी लिए लाखों रुपये का कर्जदार बन रहा है अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर किसान हित मे अपना सहयोग प्रदान करें। साथ ही महिलाओ से भी अपील है की वे भी ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुँचे।